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दुर्योधन





इतिहास के पन्नो पे

हारनेवालों के काम नहीँ

इसीलिए महाभारत में

दुर्योधन का ज्यादा नाम नहीं।

उसके शासन समय

किया था जातिवाद विलय

कर्ण को सब कहे अछूत

पहनाया वो राजमुकुट।

राजपद के लिये किया समर

सबने किया उसे गलत विचार

पांडव का कैसा राजतिलक

जबकि श्राप से पाण्डु थे नपुंसक।

दोस्ती का जब आये मिसाल

कर्ण दुर्योधन होंगे अव्वल

उनके दोस्ती का परिचायक

कर्ण को किया अंगदेश का शासक।

दुर्योधन के राज्यशासन

सबसे सुंदर और अभिन्न

प्रजा के लिए था सदा तत्पर

भारत के सुशासक वीर।

द्वंद युद्ध के समय

न था उनके मुख पे भय

प्रतिद्वंद्वी वो भीम को चाहा

जिसने छल से जीत हासिल किया।

द्रौपदी के बस्त्रहरण का पाप

ज़िन्दगी भर किया पश्चाताप

सबने मिलकर कहा अधर्मी

छल से युद्ध जीत केसे बने पाण्डव धर्मी।

ज़िन्दगी भर किया ऐसे नैक काम

अंतकाल में नसीब हुआ स्वर्गधाम

महाभारत में कई चरित्र कई योद्धा महान

मुझे सबसे प्यारा महान वीर सुयोधन।

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Shubhdristi