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संगीत क्लास





     उस दिन पुरानी डायरी साफ करते करते एक कागज का टुकड़ा खिसक कर मेरे पैरों में आ गिरा और मैं उस टुकड़े को उठाते-उठाते अतीत में खो गई। पास में किसी पुराने फ़िल्म की गाना बज रहा था और मैं उस बीते हुए कल में उस गाने को ढूंढ रही थी जो मुझे बहुत पसंद थी।
सब कुछ कल ही की बात लग रही हैं। जब मैने पहली बार संगीत की कक्षा (म्यूज़िक क्लास) को जॉइन किया था। संगीत के सुरों में हमेशा खोई रहने वाली मैं, अचानक से सुर भुलने लगी थी। इस अजीब से बर्ताव की वजह क्या थी मुझे भी कुछ समझ नहीं आ रहा था। फिर एक दिन मैने उसे देखा। देखने के बाद ऐसा लगा जैसे मेरे खोए हुए सुरों को अपना पता फिर से मिल गया है। आज भी याद है वह दिन जब उसने मंच पर मेरा प्रिय गाना गाया था। मैं तो खुशी के मारे पागल हो गई थी। 
फिर एक दिन मैने तय कर लिया कि उसे बता दूंगी कि मैं उसके लिए क्या महसूस करती हूं। उस दिन मैं उसके प्रिय रंग की सलवार पहनी थी। वह मेरे बिल्कुल सामने ही था। उसने मुझे देखा और मुस्कुराते हुए बोला- "अरे गुंजन मुझे तुम्हारा इंतजार था। सबको बता चुका हूं , एक तुम ही हो जिसे बताना छूट गया है। आओ तुम भी आओ, मुंह मीठा करो।"
‌ इतना बोलते ही उसने मेरे हाथो में एक कार्ड थमाया और मुंह में मिठाई। इससे पहले कि मुझे कुछ समझ में आए, मेरे आंखों में कार्ड के ऊपर लिखा वह लाइन पड़ा। मिठाई गले में अटक सी गई और आंखों में पानी। 
‌टप ! टप ! टप ! 

‌सब सोच रहे थे मिठाई गले में अटकने के वजह से आंख से पानी आ रहा था । पर मेरे दिल में जो बातें अटक गई थी बताने से पहले, उसका क्या करूं मैं। मैं तुरंत वहां से चली आयी। उस दिन के बाद कुछ बहाना बना के उसके शादी में जाने के लिए मना कर दिया और संगीत क्लास जाना भी छोड़ दिया। 

"ममा , मैं स्कूल से आ गई।"

 मैं लौट आई पुराने पन्नों से वापस।

"पता है ममा , आज मैं बहुत अच्छा गाना गाई और सब ने बहुत तारीफ की। ममा मैं गाना सीखना चाहती हूं। मुझे संगीत क्लॉस में जॉइन करवा दो ना।"

मेरी बेटी बिल्कुल मेरे पर गई थी। संगीत सीखने की ज़िद मुझे फिर से पुराने दिनों में लौटने के लिए मजबूर कर रहा था।
"हां मेरी प्यारी गुड़िया मैं तुझे डाल दूंगी संगीत क्लास में।"

"सच्ची ममा?"

"मुच्ची"

उसने मुझे गले लगया और भागते हुए अपने कमरे में चली गई और मैं उसके लिए नास्ता बनाने के लिए रसोई में।

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Shubhdristi